श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.75.8 
यद् राष्ट्रेऽकुशलं किञ्चिद् राज्ञोऽरक्षयत: प्रजा:।
चतुर्थं तस्य पापस्य राजा भारत विन्दति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! यदि राजा अपनी प्रजा की रक्षा नहीं करता, तो उसके राज्य में प्रजा जो भी पाप कर्म करती है, उसका एक चौथाई पाप राजा को भोगना पड़ता है ॥8॥
 
O Bharatanandan! If the king does not protect his subjects then whatever evil deeds the subjects commit in his kingdom, the king has to suffer one fourth of those sins. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)