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mahabharat 12.75.7: जो राजा प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करता है, उसे जो भी अध्ययन, दान, यज्ञ और पूजन आदि कर्म करने पड़ते हैं, उन पुण्यों का एक चौथाई भाग प्राप्त होता है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.75.7 
यदधीते यद् ददाति यज्जुहोति यदर्चति।
राजा चतुर्थभाक् तस्य प्रजा धर्मेण पालयन्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो राजा प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करता है, उसे जो भी अध्ययन, दान, यज्ञ और पूजन आदि कर्म करने पड़ते हैं, उन पुण्यों का एक चौथाई भाग प्राप्त होता है ॥7॥
 
Whatever study, charity, sacrifices and worship the subjects do, the king who looks after their subjects righteously receives one fourth of those pious deeds. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)