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mahabharat 12.75.6: हे भारत! राजा को भी अपने द्वारा रक्षित प्रजा द्वारा किये गए धर्म का एक चौथाई भाग प्राप्त होता है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.75.6 
यं हि धर्मं चरन्तीह प्रजा राज्ञा सुरक्षिता:।
चतुर्थं तस्य धर्मस्य राजा भारत विन्दति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! राजा को भी अपने द्वारा रक्षित प्रजा द्वारा किये गए धर्म का एक चौथाई भाग प्राप्त होता है ॥6॥
 
Bharat! The king also receives one fourth of the Dharma practised by his subjects who are protected by him. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)