Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.75.5: राजा को यमराज के समान अपने शत्रुओं को दण्ड देने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उसे चारों ओर से लुटेरों और चोरों को पकड़कर उनका वध कर देना चाहिए। उसे स्वार्थवश किसी भी दुष्ट व्यक्ति के अपराध को क्षमा नहीं करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नित्यमुद्यतदण्डश्च भवेन्मृत्युरिवारिषु।
निहन्यात् सर्वतो दस्यून् न कामात् कस्यचित् क्षमेत्॥ ५॥
अनुवाद
राजा को यमराज के समान अपने शत्रुओं को दण्ड देने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उसे चारों ओर से लुटेरों और चोरों को पकड़कर उनका वध कर देना चाहिए। उसे स्वार्थवश किसी भी दुष्ट व्यक्ति के अपराध को क्षमा नहीं करना चाहिए।
The king should always be ready to punish his enemies like Yamraj. He should catch the robbers and thieves from all sides and kill them. He should not forgive the crime of any wicked person due to selfish motives. 5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥