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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना
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श्लोक 4
श्लोक
12.75.4
राज्ञा हि पूजितो धर्मस्तत: सर्वत्र पूज्यते।
यद् यदाचरते राजा तत् प्रजानां स्म रोचते॥ ४॥
अनुवाद
जब कोई धर्म राजा के द्वारा आदर किया जाता है, तो वह सर्वत्र आदर पाने लगता है, क्योंकि राजा जो कुछ करता है, प्रजा भी वैसा ही करना चाहती है ॥4॥
When a religion is respected by a king, it starts getting respected everywhere because whatever the king does, the subjects like to do the same. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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