जो राजा निर्भय, पराक्रमी, आक्रमण करने में कुशल, दयालु, संयमी, प्रजा से प्रेम करने वाला और उदार है, उसी की शरण में मनुष्य जाते हैं और उसी की शरण में आकर जीवित रहते हैं ॥37॥
Men take shelter of a king who is fearless, valiant, skilful in attacking, merciful, self-controlled, loving towards his subjects and generous and survive by taking refuge in him. ॥ 37॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि पञ्चसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥