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mahabharat 12.75.36: तात! जैसे समस्त प्राणी बादलों की सहायता से और पक्षी स्वादिष्ट फल देने वाले वृक्षों की सहायता से जीवित रहते हैं, उसी प्रकार मुनियों सहित समस्त सज्जन लोग आपकी शरण में रहकर अपनी जीविका चलाएँ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.75.36 
अनु त्वां तात जीवन्तु सुहृद: साधुभि: सह।
पर्जन्यमिव भूतानि स्वादुद्रुममिव द्विजा:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तात! जैसे समस्त प्राणी बादलों की सहायता से और पक्षी स्वादिष्ट फल देने वाले वृक्षों की सहायता से जीवित रहते हैं, उसी प्रकार मुनियों सहित समस्त सज्जन लोग आपकी शरण में रहकर अपनी जीविका चलाएँ॥36॥
 
Tat! Just as all the creatures survive with the help of clouds and birds with the help of trees bearing delicious fruits, in the same way, all the good-hearted people including sages should earn their livelihood by living under your shelter. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)