Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.75.35: इसलिए हे कुरुश्रेष्ठ! आप प्रसन्नतापूर्वक कुरुदेश के लोगों के राजा बनिए। सज्जनों की रक्षा कीजिए और दुष्टों का वध करके अपना कर्तव्य पूरा कीजिए और स्वर्ग को जीतिए। 35॥ | mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वमेव प्रीतिमांस्तस्मात् कुरूणां कुरुसत्तम।
भव राजा जय स्वर्गं सतो रक्षासतो जहि॥ ३५॥
अनुवाद
इसलिए हे कुरुश्रेष्ठ! आप प्रसन्नतापूर्वक कुरुदेश के लोगों के राजा बनिए। सज्जनों की रक्षा कीजिए और दुष्टों का वध करके अपना कर्तव्य पूरा कीजिए और स्वर्ग को जीतिए। 35॥
That's why Kurushrestha! You happily become the king of the people of Kurudesh. Protect the good people and kill the wicked and thus fulfill your duty and conquer heaven. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥