Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.75.33: युधिष्ठिर ने पूछा, "पिताजी! स्वर्ग प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग क्या है? उससे प्राप्त होने वाला सर्वोत्तम सुख क्या है? और उसकी तुलना में सबसे बड़ा धन क्या है? यदि आप ये बातें जानते हैं, तो कृपया मुझे बताएँ।" | mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
किं तात परमं स्वर्ग्यं का तत: प्रीतिरुत्तमा।
किं तत: परमैश्वर्यं ब्रूहि मे यदि पश्यसि॥ ३३॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पिताजी! स्वर्ग प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग क्या है? उससे प्राप्त होने वाला सर्वोत्तम सुख क्या है? और उसकी तुलना में सबसे बड़ा धन क्या है? यदि आप ये बातें जानते हैं, तो कृपया मुझे बताएँ।"
Yudhishthira asked - Father! What is the best way to attain heaven? What is the best happiness that can be obtained from it? And what is the greatest wealth in comparison to that? If you know these things, then please tell me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥