Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.75.3: जो राजा सदैव धर्मपूर्वक अपनी समस्त प्रजा का पालन करता है, उसे चाहिए कि अपने घर आए हुए धर्मात्मा लोगों का खड़े होकर स्वागत करे और उन्हें उत्तम वस्तुएँ देकर उनका सम्मान करे ॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो राजा सदैव धर्मपूर्वक अपनी समस्त प्रजा का पालन करता है, उसे चाहिए कि अपने घर आए हुए धर्मात्मा लोगों का खड़े होकर स्वागत करे और उन्हें उत्तम वस्तुएँ देकर उनका सम्मान करे ॥3॥
A king who always looks after all his subjects in a righteous manner should stand up and welcome the righteous people who come to his home and honour them by giving them the best things. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥