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श्लोक 12.75.3  |
सर्वाश्चैव प्रजा नित्यं राजा धर्मेण पालयन्।
उत्थानेन प्रदानेन पूजयेच्चापि धार्मिकान्॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| जो राजा सदैव धर्मपूर्वक अपनी समस्त प्रजा का पालन करता है, उसे चाहिए कि अपने घर आए हुए धर्मात्मा लोगों का खड़े होकर स्वागत करे और उन्हें उत्तम वस्तुएँ देकर उनका सम्मान करे ॥3॥ |
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| A king who always looks after all his subjects in a righteous manner should stand up and welcome the righteous people who come to his home and honour them by giving them the best things. ॥ 3॥ |
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