नैकान्तविनिपातेन विचचारेह कश्चन।
धर्मी गृही वा राजा वा ब्रह्मचारी यथा पुन:॥ २८॥
अनुवाद
चाहे कोई धार्मिक हो, गृहस्थ हो, ब्रह्मचारी हो या राजा हो, वह धर्म का पूर्णतः पालन नहीं कर सकता (उसमें सदैव कुछ न कुछ अधर्म का मिश्रण रहता ही है)।॥28॥
Whether one is a religious person, a householder, a celibate or a king, he cannot follow Dharma completely (there is always some mixture of Adharma or other).॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥