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mahabharat 12.75.26: हे कुन्तीपुत्र! राज्य आदि का भार समय आने पर उन पुरुषों पर ही डाला जाता है जो उसे वहन करने के लिए नियुक्त किए जाते हैं। यद्यपि उसे वहन करते समय उन्हें कष्ट भी सहना पड़ता है, फिर भी उन पुरुषों का यश चिरस्थायी होता है और कभी क्षीण नहीं होता। ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.75.26 
काले धुरि च युक्तानां वहतां भारमाहितम्।
सीदतामपि कौन्तेय न कीर्तिरवसीदति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! राज्य आदि का भार समय आने पर उन पुरुषों पर ही डाला जाता है जो उसे वहन करने के लिए नियुक्त किए जाते हैं। यद्यपि उसे वहन करते समय उन्हें कष्ट भी सहना पड़ता है, फिर भी उन पुरुषों का यश चिरस्थायी होता है और कभी क्षीण नहीं होता। ॥26॥
 
O son of Kunti! The burden of the kingdom etc. is placed on the men who are assigned to bear the burden in due course of time. Though they have to bear hardships while carrying it, yet the fame of those men becomes everlasting and never diminishes. ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)