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mahabharat 12.75.23: तुम्हारे पिता पाण्डु सदैव तुम्हारे लिए कहा करते थे कि मेरे पुत्र का शौर्य, बल और सत्य बढ़े। तुम्हारी माता कुन्ती भी यही कामना करती थीं कि तुम्हारा माहात्म्य और उदारता बढ़े॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.75.23 
शौर्यं बलं च सत्यं च पिता तव सदाब्रवीत्।
माहात्म्यं च महौदार्यं भवत: कुन्त्ययाचत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे पिता पाण्डु सदैव तुम्हारे लिए कहा करते थे कि मेरे पुत्र का शौर्य, बल और सत्य बढ़े। तुम्हारी माता कुन्ती भी यही कामना करती थीं कि तुम्हारा माहात्म्य और उदारता बढ़े॥ 23॥
 
Your father Pandu always used to say for you that may my son's bravery, strength and truth increase. Your mother Kunti also used to wish that your greatness and generosity increase.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)