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mahabharat 12.75.19: आपकी बुद्धि अत्यंत कोमल है। आप अत्यंत सज्जन और धर्मात्मा हैं। धर्म के प्रति आपकी बड़ी निष्ठा है। इतना सब होने पर भी संसार के लोग आपको कायर समझेंगे और आपका अधिक सम्मान नहीं करेंगे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.75.19 
अपि तु त्वां मृदुप्रज्ञमत्यार्यमतिधार्मिकम्।
क्लीबं धर्मघृणायुक्तं न लोको बहु मन्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
आपकी बुद्धि अत्यंत कोमल है। आप अत्यंत सज्जन और धर्मात्मा हैं। धर्म के प्रति आपकी बड़ी निष्ठा है। इतना सब होने पर भी संसार के लोग आपको कायर समझेंगे और आपका अधिक सम्मान नहीं करेंगे॥19॥
 
Your intellect is very delicate. You are a very gentle and pious person. You have great devotion towards religion. Despite all this, people of the world will consider you a coward and will not give you much respect.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)