श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.75.14 
न हि कामात्मना राज्ञा सततं कामबुद्धिना।
नृशंसेनातिलुब्धेन शक्यं पालयितुं प्रजा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो राजा कामी है, सदा काम के बारे में सोचता रहता है, क्रूर है और अत्यंत लोभी है, वह अपनी प्रजा का पालन नहीं कर सकता ॥14॥
 
A king who is lustful, always thinks of lust, is cruel and extremely greedy cannot look after his subjects. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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