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mahabharat 12.75.13: जैसे सभी प्राणी बादलों के सहारे और पक्षी वृक्षों के सहारे जीवित रहते हैं, वैसे ही सभी मनुष्य भी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले राजा के सहारे जीवित रहते हैं ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 75: राजाके कर्तव्यका वर्णन, युधिष्ठिरका राज्यसे विरक्त होना एवं भीष्मजीका पुन: राज्यकी महिमा सुनाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.75.13 
पर्जन्यमिव भूतानि महाद्रुममिव द्विजा:।
नरास्तमुपजीवन्ति नृपं सर्वार्थसाधकम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे सभी प्राणी बादलों के सहारे और पक्षी वृक्षों के सहारे जीवित रहते हैं, वैसे ही सभी मनुष्य भी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले राजा के सहारे जीवित रहते हैं ॥13॥
 
Just as all living creatures survive on the support of clouds and birds on trees, similarly all human beings survive by depending on the King who fulfils all desires. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)