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mahabharat 12.74.7: तब धर्मात्माओं में श्रेष्ठ महर्षि वशिष्ठजी ने घोर तप करके उन दैत्यों का नाश करके राजा के लिए विजय का मार्ग प्राप्त किया॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.74.7 
तत उग्रं तपस्तप्त्वा वसिष्ठो धर्मवित्तम:।
रक्षांस्युपावधीत् तस्य पन्थानं चाप्यविन्दत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब धर्मात्माओं में श्रेष्ठ महर्षि वशिष्ठजी ने घोर तप करके उन दैत्यों का नाश करके राजा के लिए विजय का मार्ग प्राप्त किया॥7॥
 
Then Maharishi Vashishthaji, the best amongst the religious souls, by performing severe penance, destroyed those demons and obtained the path to victory for the king. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)