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mahabharat 12.74.6: अपनी सेना को इस प्रकार मारा जाता देख शत्रुराज मुचुकुन्द ने अपने विद्वान पुरोहित वशिष्ठजी को इसके लिए फटकारा ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.74.6 
स हन्यमाने सैन्ये स्वे मुचुकुन्दो नराधिप:।
गर्हयामास विद्वांसं पुरोहितमरिंदम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अपनी सेना को इस प्रकार मारा जाता देख शत्रुराज मुचुकुन्द ने अपने विद्वान पुरोहित वशिष्ठजी को इसके लिए फटकारा ॥6॥
 
Seeing his army being killed in this way, the enemy king Muchukunda reprimanded his learned priest Vashishthaji for this. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)