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mahabharat 12.74.22: ब्राह्मणों को प्रतिदिन स्नान करके संध्या-वंदन, तर्पण आदि जल-संबंधी क्रियाएँ करनी चाहिए और क्षत्रियों को सदैव शस्त्र-अस्त्र का अभ्यास बढ़ाना चाहिए। इस पृथ्वी पर जो कुछ भी है, वह सब इन दोनों के अधीन है।   |   mahabharat अध्याय 12.74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.74.22 
नित्योदकी ब्राह्मण: स्यान्नित्यशस्त्रश्च क्षत्रिय:।
तयोर्हि सर्वमायत्तं यत् किञ्चिज्जगतीगतम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को प्रतिदिन स्नान करके संध्या-वंदन, तर्पण आदि जल-संबंधी क्रियाएँ करनी चाहिए और क्षत्रियों को सदैव शस्त्र-अस्त्र का अभ्यास बढ़ाना चाहिए। इस पृथ्वी पर जो कुछ भी है, वह सब इन दोनों के अधीन है।
 
Brahmins should take bath every day and perform water related activities like Sandhya-Vandan, Tarpan etc. and Kshatriyas should always increase their practice of weapons. Whatever is there on this earth, everything is under these two.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि मुचुकुन्दोपाख्याने चतु:सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें मुचुकुन्दका उपाख्यानविषयक चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)