ब्राह्मणों को प्रतिदिन स्नान करके संध्या-वंदन, तर्पण आदि जल-संबंधी क्रियाएँ करनी चाहिए और क्षत्रियों को सदैव शस्त्र-अस्त्र का अभ्यास बढ़ाना चाहिए। इस पृथ्वी पर जो कुछ भी है, वह सब इन दोनों के अधीन है।
Brahmins should take bath every day and perform water related activities like Sandhya-Vandan, Tarpan etc. and Kshatriyas should always increase their practice of weapons. Whatever is there on this earth, everything is under these two.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि मुचुकुन्दोपाख्याने चतु:सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें मुचुकुन्दका उपाख्यानविषयक चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥