एवं यो धर्मविद् राजा ब्रह्मपूर्वं प्रवर्तते।
जयत्यविजितामुर्वीं यशश्च महदश्नुते॥ २१॥
अनुवाद
इस प्रकार धर्म में पारंगत राजा पहले ब्राह्मण की शरण लेता है और फिर उसकी सहायता से राज्यकार्य में लग जाता है, वह अजेय पृथ्वी को जीतकर भी महान यश प्राप्त करता है ॥ 21॥
In this manner a king who is well versed in Dharma first takes shelter of a Brahmin and then with his help engages in the affairs of the state, even after conquering an unconquered earth, attains great fame. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥