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mahabharat 12.74.18: मुचुकुन्द ने कहा, "हे राजन्! मैं आपके द्वारा दिया गया राज्य भोगना नहीं चाहता। मेरी एकमात्र इच्छा उस राज्य का भोग करना है, जिसे मैंने अपने बल से प्राप्त किया है।"   |   mahabharat अध्याय 12.74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.74.18 
मुचुकुन्द उवाच
नाहं राज्यं भवद्दत्तं भोक्तुमिच्छामि पार्थिव।
बाहुवीर्यार्जितं राज्यमश्नीयामिति कामये॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मुचुकुन्द ने कहा, "हे राजन्! मैं आपके द्वारा दिया गया राज्य भोगना नहीं चाहता। मेरी एकमात्र इच्छा उस राज्य का भोग करना है, जिसे मैंने अपने बल से प्राप्त किया है।"
 
Muchukunda said, "O King of kings! I do not want to enjoy the kingdom given to me by you. My only wish is to enjoy the kingdom that I have acquired by my own strength." 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)