श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.74.14 
तपो मन्त्रबलं नित्यं ब्राह्मणेषु प्रतिष्ठितम्।
अस्त्रबाहुबलं नित्यं क्षत्रियेषु प्रतिष्ठितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘ब्राह्मणों में तप और मन्त्रों का बल सदैव रहता है और क्षत्रियों में अस्त्र-शस्त्रों का बल सदैव रहता है।॥14॥
 
‘The Brahmins always have the power of austerity and mantras and the Kshatriyas have the power of weapons and arms.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)