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mahabharat 12.74.13: राजराज! ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों का उद्गम स्थान एक ही है। दोनों को स्वयंभू भगवान ब्रह्मा ने उत्पन्न किया है। यदि उनके बल और पुरुषार्थ पृथक् हो जाएँ, तो वे संसार का उद्धार नहीं कर सकते। 13॥   |   mahabharat अध्याय 12.74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.74.13 
ब्रह्मक्षत्रमिदं सृष्टमेकयोनि स्वयम्भुवा।
पृथग्बलविधानं तन्न लोकं परिपालयेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजराज! ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों का उद्गम स्थान एक ही है। दोनों को स्वयंभू भगवान ब्रह्मा ने उत्पन्न किया है। यदि उनके बल और पुरुषार्थ पृथक् हो जाएँ, तो वे संसार का उद्धार नहीं कर सकते। 13॥
 
'Rajraj! The place of origin of both Brahmin and Kshatriya is the same. Both of them were created by Swayambhu Lord Brahma. If their strength and efforts are separated then they cannot save the world. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)