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mahabharat 12.74.12: यह सुनकर मुचुकुन्द क्रोधित हो गए और उन्होंने कोषाध्यक्ष कुबेर से इस प्रकार न्यायपूर्ण, क्रोधरहित और संशयरहित वचन कहे -॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 74: ब्राह्मण और क्षत्रियके मेलसे लाभका प्रतिपादन करनेवाला मुचुकुन्दका उपाख्यान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.74.12 
मुचुकुन्दस्तत: क्रुद्ध: प्रत्युवाच धनेश्वरम्।
न्यायपूर्वमसंरब्धमसम्भ्रान्तमिदं वच:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर मुचुकुन्द क्रोधित हो गए और उन्होंने कोषाध्यक्ष कुबेर से इस प्रकार न्यायपूर्ण, क्रोधरहित और संशयरहित वचन कहे -॥12॥
 
On hearing this, Muchukunda became infuriated and spoke the following words to the treasurer Kubera that were just, devoid of anger and without any confusion -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)