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mahabharat 12.73.d6-d7h: जो नाना प्रकार के कारणों और विपत्तियों के पीछे छिपे रहस्यों को जानता हो तथा शत्रु के नाश का उपाय भी जानता हो, ऐसे महापुरुष को राजा का पुरोहित होना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान  »  श्लोक d6-d7h
 
 
श्लोक  12.73.d6-d7h 
अथान्यानां निमित्तानामुत्पातानामथार्थवित्॥
शत्रुपक्षक्षयज्ञश्च श्रेयान् राज्ञ: पुरोहित:।)
 
 
अनुवाद
जो नाना प्रकार के कारणों और विपत्तियों के पीछे छिपे रहस्यों को जानता हो तथा शत्रु के नाश का उपाय भी जानता हो, ऐसे महापुरुष को राजा का पुरोहित होना चाहिए।
 
One who knows the secrets behind the various kinds of causes and calamities and also knows the method of destruction of the enemy, such a great man should be the priest of the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)