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mahabharat 12.73.d4: राजा को जो गीत और नृत्य संबंधी कार्य प्रिय हों, उनमें पुरोहित को चाहिए कि वह किए जाने वाले कर्तव्यों का निर्देश दे तथा बलिवैश्वदेवकर्म संपन्न करे।   |   mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.73.d4 
गीतनृत्ताधिकारेषु सम्मतेषु महीपते:।
कर्तव्यं करणीयं वै वैश्वदेवबलिस्तथा॥
 
 
अनुवाद
राजा को जो गीत और नृत्य संबंधी कार्य प्रिय हों, उनमें पुरोहित को चाहिए कि वह किए जाने वाले कर्तव्यों का निर्देश दे तथा बलिवैश्वदेवकर्म संपन्न करे।
 
In the songs and dance related activities that the king likes, the priest should direct the duties to be performed and perform the Balivaishvadevkarma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)