श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.73.d1 
(तेषामर्थश्च कामश्च धर्मश्चेति विनिश्चय:।
श्लोकांश्चोशनसा गीतांस्तान् निबोध युधिष्ठिर॥
उच्छिष्ट: स भवेद् राजा यस्य नास्ति पुरोहित:।
 
 
अनुवाद
उनके धर्म, अर्थ और काम अवश्य सिद्ध होते हैं। युधिष्ठिर! इस विषय में शुक्राचार्य द्वारा गाये गए कुछ श्लोक हैं, उन्हें सुनो। जिस राजा के पास पुरोहित नहीं होता, वह अपवित्र हो जाता है।
 
Their Dharma, Artha and Kama are definitely accomplished. Yudhishthira! There are some verses sung by Shukracharya in this regard, listen to them. The king who does not have a priest becomes impure.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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