| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 12.73.9  | नैषां ब्रह्म च वर्धते नोत पुत्रा
न गर्गरो मथ्यते नो यजन्ते।
नैषां पुत्रा वेदमधीयते च
यदा ब्रह्म क्षत्रिया: संत्यजन्ति॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | जब क्षत्रिय ब्राह्मणों का त्याग कर देते हैं, तब उनका वेद-अध्ययन आगे नहीं बढ़ता, उनके पुत्र भी नहीं बढ़ते, वे दूध-दही का मथना नहीं जानते और यज्ञ भी नहीं कर पाते। इतना ही नहीं, उन ब्राह्मणों के पुत्र भी वेदों का अध्ययन नहीं करते॥9॥ | | | | When Kshatriyas abandon Brahmins, their study of Vedas does not progress, their sons also do not grow, they do not churn the pot of milk and curd and they are not able to perform Yajnas. Not only this, the sons of those Brahmins also do not study Vedas.॥ 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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