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ऐल उवाच
यदा हि ब्रह्म प्रजहाति क्षत्रं
क्षत्रं यदा वा प्रजहाति ब्रह्म।
अन्वग्बलं कतमेऽस्मिन् भजन्ते
तथा वर्णा: कतमेऽस्मिन् ध्रियन्ते॥ ७॥
अनुवाद
पुरुरवा ने पूछा - महर्षि! ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों ही साथ रहने से बलवान हो जाते हैं; किन्तु जब कोई ब्राह्मण (पुरोहित) किसी कारणवश क्षत्रिय को त्याग देता है, अथवा कोई राजा किसी ब्राह्मण को त्याग देता है, तब अन्य जाति के लोग इन दोनों में से किसकी शरण लेते हैं और कौन सबको शरण देता है?
Pururava asked - Maharshi! Brahmins and Kshatriyas both become strong when they stay together; but when a Brahmin (priest) forsakes a Kshatriya for some reason or when a king abandons a Brahmin, then which of these two do people of other castes take shelter of? And which of the two gives shelter to everyone?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥