Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.73.32-d8h: ब्राह्मण क्षत्रिय की उन्नति करता है और क्षत्रिय ब्राह्मण की उन्नति करता है। इसलिए राजा को सदैव ब्राह्मणों की विशेष पूजा करनी चाहिए; क्योंकि राजपुरोहित राजा का तथा अन्य समस्त प्रजा का भी स्वामी होता है। 32॥ | mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्म वर्धयति क्षत्रं क्षत्रतो ब्रह्म वर्धते।
एवं राज्ञा विशेषेण पूज्या वै ब्राह्मणा: सदा॥ ३२॥
(राज्ञ: सर्वस्य चान्यस्य स्वामी राजपुरोहित:।)
अनुवाद
ब्राह्मण क्षत्रिय की उन्नति करता है और क्षत्रिय ब्राह्मण की उन्नति करता है। इसलिए राजा को सदैव ब्राह्मणों की विशेष पूजा करनी चाहिए; क्योंकि राजपुरोहित राजा का तथा अन्य समस्त प्रजा का भी स्वामी होता है। 32॥
Brahmin makes Kshatriya progress and Kshatriya makes Brahmin progress. Therefore, the king should always worship the Brahmins in particular; Because the royal priest is the master of the king and all the other people too. 32॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि ऐलकश्यपसंवादे त्रिसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें पुरूरवा और कश्यपका संवादविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ७ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३९ १/२ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥