श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.73.30 
पूर्वं हि ब्रह्मण: सृष्टिरिति ब्रह्मविदो विदु:।
ज्येष्ठेनाभिजनेनास्य प्राप्तं पूर्वं यदुत्तरम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वेद के विद्वानों का मत है कि ब्राह्मण की सृष्टि सबसे पहले हुई; अतः ज्येष्ठ होने और कुलीन कुल में उत्पन्न होने के कारण प्रत्येक उत्तम वस्तु पर ब्राह्मण का प्रथम अधिकार है ॥30॥
 
The scholars of Vedas are of the opinion that the Brahmin was created first; therefore, being the eldest and born in a noble family, the Brahmin has the first right on every excellent thing. ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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