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mahabharat 12.73.29: राजा को चाहिए कि वह पहले किसी पुरोहित का चयन करे और फिर स्वयं अभिषेक करवाए। ऐसा करने से ही धर्म का पालन हो सकता है; क्योंकि धर्म के अनुसार यहाँ ब्राह्मण ही श्रेष्ठ कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.73.29 
तं चैवान्वभिषिच्येत तथा धर्मो विधीयते।
अग्रॺो हि ब्राह्मण: प्रोक्त: सर्वस्यैवेह धर्मत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह पहले किसी पुरोहित का चयन करे और फिर स्वयं अभिषेक करवाए। ऐसा करने से ही धर्म का पालन हो सकता है; क्योंकि धर्म के अनुसार यहाँ ब्राह्मण ही श्रेष्ठ कहा गया है।
 
The king should first choose a priest and then get himself anointed. Only by doing so can the Dharma be followed; because according to Dharma, Brahmins are said to be the best here. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)