Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.73.19: कश्यप बोले - राजन ! ये रुद्रदेव मनुष्यों के हृदय में आत्मा रूप में निवास करते हैं और समय आने पर अपने तथा दूसरों के शरीरों का नाश कर देते हैं। विद्वान पुरुष रुद्र को उत्पात-वायु के समान वेगवान बताते हैं और उनका रूप बादलों के समान बताते हैं ॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कश्यप बोले - राजन ! ये रुद्रदेव मनुष्यों के हृदय में आत्मा रूप में निवास करते हैं और समय आने पर अपने तथा दूसरों के शरीरों का नाश कर देते हैं। विद्वान पुरुष रुद्र को उत्पात-वायु के समान वेगवान बताते हैं और उनका रूप बादलों के समान बताते हैं ॥19॥
Kashyap said – King! This Rudradev resides in the soul form in the hearts of human beings and when the time comes, he destroys his own and others' bodies. Learned men call Rudra as fast as Utpat-vayu (stormy wind) and describe his form as like clouds. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥