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mahabharat 12.73.11: ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों को सदैव एक साथ रहना चाहिए, तभी वे एक-दूसरे की रक्षा कर पाते हैं। ब्राह्मण की उन्नति का आधार क्षत्रिय है और क्षत्रिय की उन्नति का आधार ब्राह्मण है।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.73.11 
एतौ हि नित्यं संयुक्तावितरेतरधारणे।
क्षत्रं वै ब्रह्मणो योनिर्योनि: क्षत्रस्य वै द्विजा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों को सदैव एक साथ रहना चाहिए, तभी वे एक-दूसरे की रक्षा कर पाते हैं। ब्राह्मण की उन्नति का आधार क्षत्रिय है और क्षत्रिय की उन्नति का आधार ब्राह्मण है।॥11॥
 
Both the Brahmin and the Kshatriya should always stay together, only then they are able to protect each other. The basis of the progress of a Brahmin is the Kshatriya and the basis of the progress of a Kshatriya is the Brahmin.॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)