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mahabharat 12.73.10: जो क्षत्रिय ब्राह्मणों का परित्याग कर देते हैं, उनके घर में कभी धन-संपत्ति की वृद्धि नहीं होती। उनके बच्चे न तो विद्याध्ययन करते हैं, न यज्ञ करते हैं। वे अपना पद खो देते हैं और लुटेरों की तरह लूटपाट करने लगते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.73: विद्वान् सदाचारी पुरोहितकी आवश्यकता तथा ब्राह्मण और क्षत्रियमें मेल रहनेसे लाभविषयक राजा पुरूरवाका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.73.10 
नैषामर्थो वर्धते जातु गेहे
नाधीयते सुप्रजा नो यजन्ते।
अपध्वस्ता दस्युभूता भवन्ति
ये ब्राह्मणान् क्षत्रिया: संत्यजन्ति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो क्षत्रिय ब्राह्मणों का परित्याग कर देते हैं, उनके घर में कभी धन-संपत्ति की वृद्धि नहीं होती। उनके बच्चे न तो विद्याध्ययन करते हैं, न यज्ञ करते हैं। वे अपना पद खो देते हैं और लुटेरों की तरह लूटपाट करने लगते हैं।
 
Those Kshatriyas who abandon Brahmins, their houses never see an increase in wealth. Their children neither study nor perform yajnas. They lose their position and start looting like robbers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)