श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.72.9 
ऐल उवाच
द्विजस्य क्षत्रबन्धोर्वा कस्येयं पृथिवी भवेत्।
धर्मत: सह वित्तेन सम्यग् वायो प्रचक्ष्व मे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पुरुरवा ने पूछा - वायुदेव! यह पृथ्वी धन-धान्य सहित किसकी है? ब्राह्मण की या क्षत्रिय की? मुझे ठीक-ठीक बताइए॥9॥
 
Pururava asked - Vayudev! Whose is this earth with its wealth and grains? Brahmin's or Kshatriya's? Tell me this precisely.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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