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श्लोक 12.72.9  |
ऐल उवाच
द्विजस्य क्षत्रबन्धोर्वा कस्येयं पृथिवी भवेत्।
धर्मत: सह वित्तेन सम्यग् वायो प्रचक्ष्व मे॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| पुरुरवा ने पूछा - वायुदेव! यह पृथ्वी धन-धान्य सहित किसकी है? ब्राह्मण की या क्षत्रिय की? मुझे ठीक-ठीक बताइए॥9॥ |
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| Pururava asked - Vayudev! Whose is this earth with its wealth and grains? Brahmin's or Kshatriya's? Tell me this precisely.॥ 9॥ |
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