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mahabharat 12.72.4: वायु ने कहा - नृपश्रेष्ठ! उनके मुख से ब्रह्माजी उत्पन्न हुए, उनकी दो भुजाओं से ब्राह्मण उत्पन्न हुए, उनकी दो जंघाओं से क्षत्रिय उत्पन्न हुए और उनकी दो जंघाओं से वैश्य उत्पन्न हुए॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.72.4 
मातरिश्वोवाच
ब्राह्मणो मुखत: सृष्टो ब्रह्मणो राजसत्तम।
बाहुभ्यां क्षत्रिय: सृष्ट ऊरुभ्यां वैश्य एव च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वायु ने कहा - नृपश्रेष्ठ! उनके मुख से ब्रह्माजी उत्पन्न हुए, उनकी दो भुजाओं से ब्राह्मण उत्पन्न हुए, उनकी दो जंघाओं से क्षत्रिय उत्पन्न हुए और उनकी दो जंघाओं से वैश्य उत्पन्न हुए॥4॥
 
Vayu said – Nripashrestha! Brahmaji was created from his mouth, Brahmin was created from his two arms, Kshatriya was created from his two thighs and Vaishya was created from his two thighs. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)