श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.72.3 
पुरूरवा उवाच
कुत:स्विद् ब्राह्मणो जातो वर्णाश्चापि कुतस्त्रय:।
कस्माच्च भवति श्रेष्ठस्तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पुरुरवा ने पूछा - वायुदेव! ब्राह्मणों की उत्पत्ति कहाँ से हुई? अन्य तीन वर्ण भी कहाँ से उत्पन्न हुए और उनमें ब्राह्मण श्रेष्ठ क्यों हैं? कृपया मुझे यह स्पष्ट रूप से बताइए॥3॥
 
Pururava asked - Vayudev! From where did Brahmins originate? From where did the other three castes also originate and why are Brahmins the best among them? Kindly tell me this clearly.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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