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mahabharat 12.72.22-23h: जब गर्मी होती है, तब मनुष्य छाया, जल और वायु में सुख पाता है। उसी प्रकार जब सर्दी होती है, तब अग्नि और सूर्य की गर्मी में तथा वस्त्र ओढ़ने में सुख पाता है (परन्तु जब प्रलय का भय रहता है, तब मनुष्य को किसी भी वस्तु से सुख नहीं मिलता)।॥22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  12.72.22-23h 
छायायामप्सु वायौ च सुखमुष्णेऽधिगच्छति॥ २२॥
अग्नौ वाससि सूर्ये च सुखं शीतेऽधिगच्छति।
 
 
अनुवाद
जब गर्मी होती है, तब मनुष्य छाया, जल और वायु में सुख पाता है। उसी प्रकार जब सर्दी होती है, तब अग्नि और सूर्य की गर्मी में तथा वस्त्र ओढ़ने में सुख पाता है (परन्तु जब प्रलय का भय रहता है, तब मनुष्य को किसी भी वस्तु से सुख नहीं मिलता)।॥22 1/2॥
 
When it is hot, man feels comfortable in the shade, water and air. Similarly, when it is cold, he feels comfortable in the heat of fire and sun and in covering himself with clothes (but when there is fear of chaos, man does not get comfort from anything).॥22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)