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mahabharat 12.72.21-22h: देवता और पितर भी इस मृत्युलोक से दिए गए यज्ञ और श्राद्ध से जीवित रहते हैं। अतः इस धर्म का कल्याण राजा पर ही निर्भर है। 21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  12.72.21-22h 
इतो दत्तेन जीवन्ति देवता: पितरस्तथा॥ २१॥
राजन्येवास्य धर्मस्य योगक्षेम: प्रतिष्ठित:।
 
 
अनुवाद
देवता और पितर भी इस मृत्युलोक से दिए गए यज्ञ और श्राद्ध से जीवित रहते हैं। अतः इस धर्म का कल्याण राजा पर ही निर्भर है। 21 1/2॥
 
Gods and ancestors also live by the Yagya and Shraddha given from this mortal world. Therefore, the welfare of this religion depends only on the king. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)