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mahabharat 12.72.20-21h: देवता, मनुष्य, पितर, गन्धर्व, नाग और राक्षस - ये सभी यज्ञ का आश्रय लेकर जीवित रहते हैं; किन्तु जहाँ राजा नहीं होता, उस राज्य में यज्ञ नहीं किये जाते।   |   mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  12.72.20-21h 
देवा मनुष्या: पितरो गन्धर्वोरगराक्षसा:॥ २०॥
यज्ञमेवोपजीवन्ति नास्ति चेष्टमराजके।
 
 
अनुवाद
देवता, मनुष्य, पितर, गन्धर्व, नाग और राक्षस - ये सभी यज्ञ का आश्रय लेकर जीवित रहते हैं; किन्तु जहाँ राजा नहीं होता, उस राज्य में यज्ञ नहीं किये जाते।
 
Gods, humans, ancestors, Gandharvas, serpents and demons - all of them take shelter of sacrifices and survive; but where there is no king, sacrifices are not performed in that kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)