श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.72.2 
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
पुरूरवस ऐलस्य संवादं मातरिश्वन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
इस विषय में विद्वान लोग इलाकुमार पुरुरवा और वायु के संवाद के प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं॥ 2॥
 
In this regard learned people cite the example of the ancient history of the dialogue between Ila Kumar Pururava and Vayu.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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