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mahabharat 12.72.19-20h: राजा को भी अपने राज्य में भलीभाँति रक्षित प्रजा द्वारा आचरण किये जाने वाले धर्म का एक चौथाई भाग प्राप्त होता है ॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.72.19-20h 
राष्ट्रे चरन्ति यं धर्मं राज्ञा साध्वभिरक्षिता:॥ १९॥
चतुर्थं तस्य धर्मस्य राजा भागं तु विन्दति।
 
 
अनुवाद
राजा को भी अपने राज्य में भलीभाँति रक्षित प्रजा द्वारा आचरण किये जाने वाले धर्म का एक चौथाई भाग प्राप्त होता है ॥19 1/2॥
 
The king also receives one fourth of the Dharma which is practised by the people who are well protected by him in his kingdom. ॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)