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mahabharat 12.72.18-19h: इस प्रकार राजा के संरक्षण में समस्त प्रजा धर्मात्मा, अपने-अपने धर्म में तत्पर और सब ओर से निर्भय हो जाती है ॥18 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.72.18-19h 
एवमेव प्रजा: सर्वा राजानमभिसंश्रिता:॥ १८॥
सम्यग्वृत्ता: स्वधर्मस्था न कुतश्चिद् भयान्विता:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार राजा के संरक्षण में समस्त प्रजा धर्मात्मा, अपने-अपने धर्म में तत्पर और सब ओर से निर्भय हो जाती है ॥18 1/2॥
 
Thus, under the protection of the King, all subjects become virtuous, devoted to their respective religions and fearless from all sides. ॥18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)