Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.72.15-16: और जो अपनी समस्त भावनाओं से युक्त बुद्धि के द्वारा राजा को सन्मार्ग पर चला सकता है; क्योंकि जो ब्राह्मण कुलीन कुल में उत्पन्न हुआ है, शुद्ध बुद्धि से युक्त है और विनम्र है, वह विचित्र वचन बोलकर राजा को कल्याण के मार्ग पर चलाता है। राजा ब्राह्मण द्वारा बताए गए धर्म का आचरण करता है॥ 15-16॥ | mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो राजानं नयेद् बुद्धॺा सर्वत: परिपूर्णया।
ब्राह्मणो हि कुले जात: कृतप्रज्ञो विनीतवान्॥ १५॥
श्रेयो नयति राजानं ब्रुवंश्चित्रां सरस्वतीम्।
राजा चरति यद् धर्मं ब्राह्मणेन निदर्शितम्॥ १६॥
अनुवाद
और जो अपनी समस्त भावनाओं से युक्त बुद्धि के द्वारा राजा को सन्मार्ग पर चला सकता है; क्योंकि जो ब्राह्मण कुलीन कुल में उत्पन्न हुआ है, शुद्ध बुद्धि से युक्त है और विनम्र है, वह विचित्र वचन बोलकर राजा को कल्याण के मार्ग पर चलाता है। राजा ब्राह्मण द्वारा बताए गए धर्म का आचरण करता है॥ 15-16॥
And who can lead the king on the right path through his wisdom, which is full of all feelings; because the Brahmin who is born in a noble family, is endowed with pure wisdom and is humble, he leads the king on the path of welfare by speaking strange words. The king practices the Dharma which is told by the Brahmin.॥ 15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥