Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.72.13-14: यदि तुम स्वधर्म पालन के फलस्वरूप स्वर्ग में उत्तम स्थान की खोज कर रहे हो, तो जो भी भूमि तुम जीतो, वह सब भूमि किसी ऐसे ब्राह्मण को सौंप दो जो शास्त्र और सदाचार में पारंगत हो, धर्म का ज्ञाता हो, तपस्वी हो, स्वधर्म से संतुष्ट हो तथा धन कमाने में लिप्त न हो ॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 12.72: राजाके लिये सदाचारी विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा प्रजापालनका महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि स्वर्गं परं स्थानं स्वधर्मं परिमार्गसि।
यत् किञ्चिज्जयसे भूमिं ब्राह्मणाय निवेदय॥ १३॥
श्रुतवृत्तोपपन्नाय धर्मज्ञाय तपस्विने।
स्वधर्मपरितृप्ताय यो न वित्तपरो भवेत्॥ १४॥
अनुवाद
यदि तुम स्वधर्म पालन के फलस्वरूप स्वर्ग में उत्तम स्थान की खोज कर रहे हो, तो जो भी भूमि तुम जीतो, वह सब भूमि किसी ऐसे ब्राह्मण को सौंप दो जो शास्त्र और सदाचार में पारंगत हो, धर्म का ज्ञाता हो, तपस्वी हो, स्वधर्म से संतुष्ट हो तथा धन कमाने में लिप्त न हो ॥13-14॥
If you are searching for a better place in heaven as a result of following your Swadharma, then whatever land you conquer, hand over all that land to a Brahmin who is well-versed in scriptures and good conduct, knowledgeable in religion, ascetic and satisfied with Swadharma, and who is not engrossed in earning money. 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥