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mahabharat 12.71.9: यदि किसी मूर्ख मनुष्य को, जो कार्य करने में कुशल नहीं है और जो काम और क्रोध के वश में है, धन संग्रह का कार्य सौंपा जाए, तो वह अनुचित साधनों से लोगों को दुःख पहुँचाता है ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.71.9 
मूर्खो ह्यधिकृतोऽर्थेषु कार्याणामविशारद:।
प्रजा: क्लिश्नात्ययोगेन कामक्रोधसमन्वित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि किसी मूर्ख मनुष्य को, जो कार्य करने में कुशल नहीं है और जो काम और क्रोध के वश में है, धन संग्रह का कार्य सौंपा जाए, तो वह अनुचित साधनों से लोगों को दुःख पहुँचाता है ॥9॥
 
If a foolish person who is not skilled in performing a task and is under the influence of lust and anger is made responsible for collecting wealth, he causes suffering to the people by improper means. ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)