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आर्जवेन च सम्पन्नो धृत्या बुद्धॺा च भारत।
यथार्थं प्रतिगृह्णीयात् कामक्रोधौ च वर्जयेत्॥ ६॥
अनुवाद
हे भरतपुत्र! राजा को चाहिए कि वह सरल स्वभाव वाला हो, धैर्य और बुद्धि के बल से सत्य को ग्रहण करे और काम-क्रोध का त्याग कर दे॥6॥
O son of Bharat! The king should be endowed with a simple nature, accept the truth with the power of patience and wisdom and give up lust and anger. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥