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mahabharat 12.71.6: हे भरतपुत्र! राजा को चाहिए कि वह सरल स्वभाव वाला हो, धैर्य और बुद्धि के बल से सत्य को ग्रहण करे और काम-क्रोध का त्याग कर दे॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.71.6 
आर्जवेन च सम्पन्नो धृत्या बुद्धॺा च भारत।
यथार्थं प्रतिगृह्णीयात् कामक्रोधौ च वर्जयेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! राजा को चाहिए कि वह सरल स्वभाव वाला हो, धैर्य और बुद्धि के बल से सत्य को ग्रहण करे और काम-क्रोध का त्याग कर दे॥6॥
 
O son of Bharat! The king should be endowed with a simple nature, accept the truth with the power of patience and wisdom and give up lust and anger. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)