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mahabharat 12.71.31: हे कुन्तीपुत्र! इस प्रकार यत्नपूर्वक धर्म का पालन करो। इस प्रकार पुण्य का फल प्राप्त करके तुम कभी भी चिन्ताग्रस्त नहीं होगे। ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.71.31 
एवं धर्मं प्रयत्नेन कौन्तेय परिपालय।
तत: पुण्यफलं लब्ध्वा नाधिबन्धेन योक्ष्यसे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! इस प्रकार यत्नपूर्वक धर्म का पालन करो। इस प्रकार पुण्य का फल प्राप्त करके तुम कभी भी चिन्ताग्रस्त नहीं होगे। ॥31॥
 
O son of Kunti! Follow the Dharma diligently in this manner. By receiving the fruits of virtue in this manner, you will never be in a state of worry. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)