Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.71.30: जो मनुष्य उत्तम यज्ञ द्वारा गृहस्थ-धर्म का, उत्तम स्वाध्याय द्वारा ब्रह्मचर्य का और महान तप द्वारा वानप्रस्थ-धर्म का पालन करता है, वह समस्त पुण्य लोकों पर अधिकार प्राप्त कर लेता है, और जो राजा धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करता है, वह क्षण भर में ही उन्हें प्राप्त कर लेता है ॥30॥ | mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य उत्तम यज्ञ द्वारा गृहस्थ-धर्म का, उत्तम स्वाध्याय द्वारा ब्रह्मचर्य का और महान तप द्वारा वानप्रस्थ-धर्म का पालन करता है, वह समस्त पुण्य लोकों पर अधिकार प्राप्त कर लेता है, और जो राजा धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करता है, वह क्षण भर में ही उन्हें प्राप्त कर लेता है ॥30॥
A man who follows Grihastha-Dharma through the best Yagya, celibacy through best Swadhyaya and Vanaprastha-Dharma through great penance attains control over all the virtuous worlds, a king who follows his subjects religiously attains them in a moment. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥